सोमवार, 28 मई 2012

नेता जी के खातिर सब कुछ खेल बा 
उनकर हो गइल व्यापारियन से मेल बा 
हमनी क रोटी दाल सब मुहाल  बा 
नेता जी के थाली  में मुर्गा हलाल बा 
हमनी क गुहार तनी  देर में सुनाला 
नेता जी छीके ले त गूंज मच जाला  
वोट  मांगत बेर उनके ना बुझाला 
कुर्सी पर बईठते  उनकर बोली बिकाला 
नेता जी के आस -पास चमचन क रेल बा 
लोकतंत्र में 'लोक ' नइखे , बाकी  सब खेल बा .

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