शनिवार, 2 जून 2012

काहे के हमके भेजला हो बाबा
ओही देसवा ..जहा धने पुजाला
बाबू क नेह  न माई क पिरितिया
ननदी मारे ले जहां 
कस कस तनवा 

हमरे खातिर बेच के 
आपन सब धनवा
हमार घर जोरे में 
कएला सारा जतनवा

तबो इहंवा सबके कमी लागेला 
हमरा के सब केहू  बोली मारेला 
अबकी जे केहू हमसे 
कुछो मंगवाई 
हमरे से कईसे अब
तोहसे कहल जाई......
 
 

सोमवार, 28 मई 2012

नेता जी के खातिर सब कुछ खेल बा 
उनकर हो गइल व्यापारियन से मेल बा 
हमनी क रोटी दाल सब मुहाल  बा 
नेता जी के थाली  में मुर्गा हलाल बा 
हमनी क गुहार तनी  देर में सुनाला 
नेता जी छीके ले त गूंज मच जाला  
वोट  मांगत बेर उनके ना बुझाला 
कुर्सी पर बईठते  उनकर बोली बिकाला 
नेता जी के आस -पास चमचन क रेल बा 
लोकतंत्र में 'लोक ' नइखे , बाकी  सब खेल बा .

मंगलवार, 22 मई 2012

इ ब्लॉग हम भिखारी ठाकुर के नामे समर्पित कर तानी .